ताऊ, खान चा और सरदार आपको सादर प्रणाम,
तीन ताल से मेरी भेंट प्रथम एपिसोड से ही हो चुकी थी हालांकि जैसे आपको मालूम है इंसान आलस्य का पुतला होता है उसी के चलते मैने पुराने एपिसोड नहीं देख थे परंतु पिछले तीन महीने से मैं आप को लगातार सुन रहा हूँ और अब लगता है की लोग सही कहते है अपने से बड़ों की बातें अगर ध्यान से सुनो तो जीवन के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलेगा और जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण भी मिलता है आपको लोगो की बातें इतनी प्रासंगिक होती है कि लगता है ही नहीं की आप मुझसे दूर हो ऐसा लगता है जैसे ताऊ मुझे समझा रहे है ,खान चा हँसा रहे है और सरदार माहौल को बैलेंस कर रहे है, जब भी कोई समस्या आती है तो सोचता हूँ की ताऊ की राए इस पर क्या होती मैं तीन ताल को बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहूंगा मेरे जीवन में मुस्कुराहट के तीन रंग और भरने के लिए।
सवाल -देश में बढ़ती साम्प्रदायिकता कैसे खत्म होगी?